मामला संक्षिप्त
जिले की एसआईटी ने यह खुलासा किया है कि लगभग ₹400 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी की गई थी।
इस मामले में मास्टरमाइंड मो. इखलाक व उसके सहयोगी इत्तेफात आलम उर्फ दानिश कबाड़ी को गिरफ्तार किया गया है।
इसमें 144 फर्जी फर्मों का इस्तेमाल हुआ और बेरोजगार लोगों के दस्तावेज़ों का दुरुपयोग किया गया।
प्रारंभिक जांच में यह खुलासा हुआ है कि दिल्ली लगने वाले कॉल-सेंटर और मोबाइल नंबर/ई-मेल की मदद से फर्जी पंजीकरण किए गए।
400 crore GST Chori
घटना-प्राकृतिक विवरण
इस गिरोह ने बेरोजगार लोगों को “नौकरी व लोन दिलाने” का झांसा दिया, उनके दस्तावेज़ हासिल किए और इन दस्तावेज़ों से फर्जी फर्में बनाई गईं।
इन फर्मों के माध्यम से वित्तीय लेन-देनों को कागजों पर बनाकर आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) व GST बिलिंग के माध्यम से टैक्स चोरी की गई।
गिरफ्तारी के दौरान आरोपी के पास एक मोबाइल फोन, आठ एटीएम कार्ड, एक पॉलिसी-मार्केट कार्ड व तीन आधार कार्ड बरामद हुए।
डायरी जांच में आरोपी के पास 535 फर्मों का विवरण मिला।
विस्तृत पक्ष
मामला तब सामने आया जब दो लोहे से लदे ट्रक पकड़े गए थे, जिन पर फर्जी ई-वे बिल एवं फर्म नाम अंकित थे। इसके बाद प्रदेश राजशुल्क विभाग एवं पुलिस ने मिलकर जांच की।
नेटवर्क बहुत व्यापक था — एक रिपोर्ट के मुताबिक 22 से अधिक राज्यों में फर्जी फर्मों के जरिए लेन-देने का आँकलन है।
विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सम्बंधित फर्मों व नेटवर्क की जांच तेज करने को कहा है।
प्रभाव एवं चुनौतियाँ
इस प्रकार का टैक्स फ्रॉड राज्य के राजस्व को सीधे प्रभावित करता है, जिससे कानूनी व प्रशासनिक संसाधनों पर दबाव बढ़ता है।
फर्जी फर्मों व आईटीसी-दाखिलाओं की पहचान व रोकथाम चुनौतिपूर्ण बनी हुई है क्योंकि अक्सर पते, मोबाइल/ई-मेल बदल दिए जाते हैं।
वास्तविक व्यापारियों को इस तरह के धोखाधड़ी से प्रतिस्पर्धा असमतल हो सकती है, क्योंकि ईमानदार कारोबार पर टैक्स-का बोझ व अन्य फ्रॉडर्स को लाभ मिल रहा हो सकता है।
आगे की कार्यवाही
पुलिस व टैक्स विभाग ने कई व्यक्तियों व फर्मों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है, और जिन गिरोह सदस्यों की पहचान नहीं हुई है, उनकी तलाश जारी है।
विभाग ने फर्जी पंजीकरण, मोबाइल/ई-मेल ट्रैकिंग, बैंक लेन-देहनों का विश्लेषण आदि को प्राथमिकता दी है ताकि पूरे नेटवर्क को उजागर किया जा सके।
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